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हनुमान जी अपने जीवन में एक ही युद्ध हारे थे वो भी इस योगी से !!

हनुमान जी अपने जीवन में एक ही युद्ध हारे थे वो भी इस योगी से !!

नमस्कार दोस्तों आज की खबर में हम आपको बताने जा रहे है उस युद्ध के बारे में जो हनुमान जी हार  गये थे तो आइये जानते है , एक बार मछेन्द्र नाथ रामेश्वरम में आते हैं , और राम जी का सेतु देख कर प्रसन्न हो जाते है , और राम जी की भक्ति में लीन होकर समुद्र में स्नान करने लग जाते है , तभी वहां हनुमान जी जो की एक बूढ़े बन्दर के रूप में बैठे हुवे  होते है उनकी नजर मछेन्द्र नाथ पर पड़ती है हनुमान जी जानते थे की मछिन्द्र नाथ एक सिद्ध योगी है फिर भी हनुमान जी उनकी शक्ति की परीक्षा लेना चाहते थे फिर हनुमान जी अपनी लीला आरम्भ की और अचानक जोरदार बारिश शुरु होती है |

  यह देख कर वानर रूपी हनुमान बारिश से बचने के लिए एक पहाड़ पर प्रहार करते है , और वह गुफा बनाने की कौशिश करने लगते है और यह सब मछिन्द्र नाथ देखते है और हनुमान जी को कहते है की हे वानर तुम मुर्खता कर रहे हो जब प्यास लगती है तब कुआ नहीं खोदा जाता तुम्हे अपने घर का प्रबंध पहले ही कर लेना चाहिए था |

     यह सुन कर हनुमान जी मछिन्द्र नाथ को पूछते है की आप कौन हैं | इस पर मछिन्द्र नाथ कहते हैं की में एक सिद्ध योगी हु और मुझे मंत्र शक्ति प्राप्त है यह सुनकर वानर रूपी हनुमान सोचते है की मछिन्द्र नाथ की शक्ति की परीक्षा लेने का यह सही समय है , और मछिन्द्र नाथ से जानबूझ कर कहते हैं महाबली हनुमान जी से श्रेठ और बलवान योधा इस संसार में कोई नही है कुछ समय हनुमान जी की सेवा करने के कारण उन्होंने प्रसन्न होकर अपनी शक्ति का एक प्रतिशत हिस्सा मुझे भी दिया है अगर आप में इतनी शक्ति है और आप सिद्ध योगी हैं तो मुझे युद्ध में हराकर दिखाओ नहीं तो खुद को सिद्ध योगी कहना बंद कर दो मछिन्द्र नाथ उस वानर की चुनोती स्वीकार करते है , और युद्ध की शूरुआत हो जाती है वानर रूपी हनुमान हवा में उड़ते हैं और अचानक मछिन्द्र नाथ पर एक एक करके सात बड़े पर्वत उनके ऊपर फेकते जाते है पर्वतों को अपनी तरफ आते देख मछिन्द्र नाथ ने अपनी मन्त्र शक्ति का प्रयोग कर वह सातो पर्वतों को हवा में स्थिर कर दिय था और फिर बाद में उसे अपने मूल स्थान पर वापिस भेज देते है यह देख बाहुबली हनुमान क्रोधित हो जाते है और वहां का सबसे बड़ा पर्वत उठाकर मछिन्द्र नाथ पर फेंकने के लिए अपने हाथ में ले लेते है |

  यह देखते ही मछिन्द्र नाथ ने समुद्र के पानी की कुछ बुँदे अपने हाथ में लेकर उस पर वार्ताकर्ष्ण मन्त्र का प्रयोग किया और उस पानी की बूंदों को हनुमान जी के उपर फेंक दिया पानी की बूंदों का स्पर्श होते ही हनुमान जी का शरीर आसमान में स्थिर हो गया और उनका शरीर हलचल करने में असमर्थ हो गया उस मंत्र के कारण कुछ  क्षणों के लिए हनुमान जी की सारी शक्ति छिन्न हो गयी और इस वजह से उस पर्वत का भार उठा पाना भी भारी हो गया और हनुमान जी तड़पने लगे यह देख हनुमान जी के पिता वायु देव जमीन पर आकर मछिन्द्र नाथ से हनुमान जी को क्षमा करने की प्रार्थन करते है वायु देव की प्रार्थन पर मछिन्द्र नाथ ने हनुमान जी मुक्त कर दिया तभी हनुमान जी अपने वास्तविक रूप में आ गये और उन्होंने मछिन्द्र नाथ से कहा हे मछिन्द्र नाथ आप स्वंय नारायण के अवतार है यह में जनता था फिर भी आपकी शक्ति की परीक्षा लेने की चेष्ठा कर बैठा कृप्या आप मुझे माफ़ कर दीजिये यह सुन मछिन्द्र नाथ हनुमान जी को माफ़ कर देते हैं |

 तो दोस्तों इस खबर में इतना ही अगर आपको यह खबर अच्छी लगी तो कमेंट में अपनी राय जरुर दीजिये |

     धन्यवाद :-

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