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शिव पूजा एवं अभिषेक में ये 5 गलती भूल कर भी न करे - शिव की पूजा कैसे करे - शिव पूजा

शिव पूजा एवं अभिषेक में ये 5 गलती भूल कर भी न करे - शिव की पूजा कैसे करे - शिव पूजा

नमस्कार दोस्तों Tecgossip News में आपका स्वागत है, जो आपके लिए लाता है हर रोज नयी और ताजा खबरे , आज हम आपको बताएँगे की भगवान् शिव की पूजा कैसे करते है |

   हम शिवलिंग की पूजा भगवन भोलेनाथ को खुश करके अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति करने के लिए करते है, शिव शंकर बहुत आसानी से खुश होने वाले भगवान् है, परन्तु शिवलिंग की पूजा में ये पांच गलतिय कभी भी नां करे वरना आपको पूजा पाठ अभिषेक का फल तो मिलेगा ही नही उल्टा इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है, आईये वो पांच बाते क्या है जिससे हमें बच के रहना है, उसके बारे में मै आपको क्रम से बताता हु, कभी भी शिव जी की पूजा में शंख का उपयोग नही किया जाता है, क्योकि शंखचुल का वध भगवन शंकर ने किया था और शंखचुल का ही रूप माना गया है शंख, शंखचुल और भगवन शिव में शत्रुता का भाव माना जाता है, यह शंखचुल भगवन विष्णु का प्रिय भक्त था, इसलिए भगवान विष्णु की पूजा में और उनके सभी अवतारों की पूजा में शंख का विशेष महत्व होता है, शंख से ही भगवन विष्णु का स्नान और अभिषेक किया जाता है, इसलिए शिवलिंग की पूजा और अभिषेक में शंख का उपयोग भूल कर भी नां करे |

 दूसरा तुलसी का उपयोग कई बार लोग प्रसाद बनाने के समय तुलसी पत्ती को पवित्र मान कर शिव जी की पूजा के लिए बने प्रसाद में भी तुलसी का उपयोग कर देते है, और उसी तुलसी डले हुवे प्रसाद से शिव जी को भोग लगा देते है, तुलसी का प्रसाद या तुलसी दल का उपयोग शिवलिंग में किसी भी रूप में नही किया जाता और न ही इसे शिवलिंग में चढाया जाता है, यह पूरी तरह से वर्जित है, तुलसी को भगवन विष्णु ने अपनी पत्नी का दर्जा दिया है, इसलिए तुलसी का प्रयोग भगवान शिव की पूजा में पूरी तरह वर्जित है, यह शिर्फ़ विष्णु जी की ही पूजा में उपयोग किया जाता है, तुलसी जी उपयोग विष्णु जी और उनके सारे अवतारों, भोग, प्रसाद आदि में प्राथमिकता से किया जाता है, तुलसी के बिना विष्णु पूजा को अधुरा माना गया है, तो इसलिए तुलसी का उपयोग भगवन शिव की पूजा में बिलकुल नां करे, तुलसी को शंखचुल की पत्नी भी बताया गया है |

   तीसरा तिल का उपयोग तिल से बनी हुई सामग्री तिल से बने हुई मिठाइयां या तिल की चक्की तिल के लड्डू या अन्य सामग्रियों को शिवलिंग की पूजा में कभी भी उपयोग नही किया जाता, क्योकि तिल को भगवान् विष्णु का मेल माना गया है या उनके मेल से तिल उत्पन्न हुवा है ऐसा मन जाता है, इसलिए भगवान् शिव की पूजा में तिल का बिल्कुल उपयोग नं करे किसी विशेष स्तिथि जैसे मकरशक्रांति या किसी विशेष पूजा के समय अपने पंडित से सलाह के बाद ही इसका उपयोग करे |

 चौथा काफी लोग कुंकुं से शिवलिंग में टिक्का लगाने का प्रचलन बताते हैं, भगवन भोले नाथ बैरागी है उनको श्रगार सामग्रियों से दूर दूर तक कोई नाता नही है, कुंकुं एक श्रगार सामग्री मानी जाती है इसलिए शिव जी को या शिवलिंग में कभी भी कुंकुं से नं तो श्रगार किया जाता और नं ही टिक्का लगाया जाता, शिव जी को हमेशा चंदन या अष्टदल आदि चीजों से ही उन्हें टिक्का लगाते है |

पांचवा सामन्यता लौग हल्दी आदि का लेप भी शिवलिंग में कर दिया करते है, जो शिवलिंग में पूरी तरह से वर्जित है क्योकि हल्दी भी एक श्रगार सामग्री मानी गयी है, और भगवान् शिव को किसी भी श्रगार सामग्री का उपयोग नही किया जाता, नारियल का भी उपयोग शिवलिंग में नही किया जाता, नारियल का प्रसाद भी शिवलिंग में सामान्यत शिवलिंग में नही चढाते अगर आप शिवलिंग में नारियल प्रसाद के रूप में चढ़ाये भी हैं तो उसे फोड़ कर प्रसाद के रूप में ग्रहण नही करना हैं पूजा सामग्री के बाद इसे नदी या तालाब में विसर्जन कर दिया जाता है |

तो आप शिवलिंग की पूजा में इन विशेष सावधानियो का उपयोग करिये, और आप अंपनी मन चाही मनोकामना को पूरा करिये 

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